कक्षा एक से आठवीं तक एनसीईआरटी की पुस्तकें ही लागू करने की मांग
प्राइवेट टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने भेजा सीएम को ज्ञापन
निजी स्कूलों में हर साल बदल दी जाती हैं किताबें
~शैली सक्सेना
लखनऊ। निजी स्कूलों में हर साल किताबें बदलने और महंगे प्रकाशनों की पुस्तकें अनिवार्य करने की प्रथा पर रोक नहीं लगाई जा सकी है। इसे लेकर प्राइवेट टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने जिलाधिकारी के माध्यम से प्रदेश सरकार को ज्ञापन सौंपा। एसोसिएशन ने कक्षा एक से आठवीं तक के विद्यार्थियों के लिए एनसीईआरटी की पुस्तकें ही लागू करने की मांग की, ताकि अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।

प्राइवेट टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष देवेंद्र कुमार सिंह और संयोजक शिशिर कुमार वाजपेयी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी से मुलाकात करने पहुंचा। उन्होंने डीएम को ज्ञापन देकर कहा कि लखनऊ के अधिकांश निजी स्कूल हर साल अपने मनमाने प्रकाशनों की किताबें बदलते हैं। इन्हें अपनी ही दुकानों से बेचकर भारी कमीशन कमाते हैं। इससे अभिभावकों को किताबें खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
40 से 50 प्रतिशत तक कमीशन लेकर बेचते हैं किताबें
प्राइवेट टीचर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने यह भी आरोप लगाया कि निजी स्कूल 40 से 50 प्रतिशत तक कमीशन लेकर महंगी किताबें बेचते हैं, जबकि सरकार की शिक्षा नीति के तहत कक्षा एक से आठ तक एनसीईआरटी की पुस्तकें अनिवार्य रूप से लागू होनी चाहिए। एसोसिएशन ने स्कूलों में जुलाई-अगस्त में औचक निरीक्षण कराने की मांग की है। वजह बताई गई कि इससे सुनिश्चित किया जा सकेगा कि वहां एनसीईआरटी की किताबें लागू की जा रही हैं या नहीं। उन्होंने सभी निजी स्कूल प्रबंधकों से इस संबंध में लिखित स्पष्टीकरण भी लेने का अनुरोध किया। साथ ही जनहित में इस शिकायत पर तत्काल कार्रवाई और सभी निजी स्कूलों को एनसीईआरटी की पुस्तकें लागू करने का निर्देश देने की मांग की।
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