पश्चिम बंगाल की महिला के कागज़ात पाए गए फर्जी
असलमपुर में अनुसूचित जाति का फर्जी प्रमाणपत्र लगाकर लड़ा था चुनाव
जाति छिपाकर प्रधान बनी महिला को तीन साल की सजा
बिजनौर। अनुसूचित जाति का फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर असलमपुर भुल्लन की ग्राम प्रधान बनी शिवाली को दोषी पाने पर एससी/एसटी एक्ट कोर्ट के विशेष जज अवधेश कुमार ने तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। दोषी महिला पर बीस हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है।

विश्व दलित परिषद युवा मोर्चा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष नगीना निवासी पुष्पेंद्र आनंद ने इस मामले में जुलाई 2017 में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि कोतवाली ब्लॉक की ग्राम पंचायत असलमपुर भुल्लन का ग्राम प्रधान पद अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित था। गैर अनुसूचित जाति की महिला शिवाली पत्नी ओमप्रकाश चौहान ने अनुसूचित जाति का फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर नामांकन दाखिल किया। वह मूलतः पश्चिम बंगाल के मालदा जनपद की रहने वाली थी। चुनाव में वह ग्राम प्रधान चुनी गई। शिवाली के ग्राम प्रधान निर्वाचित होने पर उसकी प्रतिद्वंद्वी लक्ष्मी देवी के संवैधानिक अधिकारों का हनन हुआ।
साक्ष्य के अभाव में लेखपाल दोष मुक्त
पुलिस क्षेत्राधिकारी नगीना ने मामले की विवेचना करते हुए शिवाली सहित कई लोगों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। कोर्ट में विचारण के दौरान कई गवाह पेश किए गए, जिन्होंने आरोपों का समर्थन किया। अदालत ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर चुनाव लड़कर ग्राम प्रधान बनने के अपराध को संगीन मानते हुए महिला शिवाली को सजा सुनाई, जबकि इस मामले में शामिल हलका लेखपाल ओमप्रकाश को साक्ष्य के अभाव में दोष मुक्त कर दिया।

पश्चिम बंगाल की शिवाली ढाई साल रही प्रधान
असलमपुर भुल्लन से शिवाली देवी 2015 में ग्राम प्रधान चुनी गई थी। दूसरे स्थान पर रही लक्ष्मी देवी ने उसके खिलाफ फर्जी जाति प्रमाण के आधार पर चुनाव लड़ने की शिकायत की थी। इसके बावजूद करीब ढाई साल तक शिवाली देवी ग्राम प्रधान रही। बाद में उसे पद से हटा दिया गया और लक्ष्मी देवी पत्नी रोहताश ग्राम प्रधान बनीं।
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