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बिजनौर। भ्रूण हत्या रोकने के लिए बना पीसीपीएनडीटी अधिनियम (पूर्व प्रसव और प्रसव पूर्व निदान तकनीक निषेध अधिनियम) एक बार फिर विवादों के घेरे में है। जिलाधिकारी जसजीत कौर की अध्यक्षता में हुई पीसीपीएनडीटी सलाहकार समिति की बैठक में जहां अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर शिकंजा कसने के सख्त निर्देश दिए गए, वहीं जमीनी सच्चाई इन दावों की धज्जियाँ उड़ाती नजर आई।

बैठक में नियमित औचक निरीक्षण, पत्रावलियों की गहन जांच और मासिक ही बैठकें अनिवार्य करने जैसे तमाम प्रस्ताव रखे गए। लेकिन गत कई माह में न तो कोई सेंटर सील हुआ, न ही किसी अवैध अल्ट्रासाउंड पर प्रशासनिक डंडा चला। नोडल अधिकारी डॉ. के. के. राहुल पर अल्ट्रासाउंड सेंटरों से अवैध वसूली के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। जनचर्चा है कि जांच के नाम पर औपचारिक खानापूर्ति होती है, असल में रेट तय कर सेंटरों को खुला छोड़ दिया जाता है।

जिले में ऐसे दर्जनों अल्ट्रासाउंड सेंटर सक्रिय हैं जो पंजीकृत नहीं हैं। कथित नीम हकीम बिना प्रशिक्षण के प्रसव पूर्व जांच कर रहे हैं, और इनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखाई दे रही। वहां पर नीम हकीमों द्वारा रिपोर्ट्स तैयार की जा रही हैं।

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