किसान बनें आत्मनिर्भर और कम करें फसल के नुकसान
नेशनल पेस्ट सर्विलांस सिस्टम का उठाएं लाभ
अब किसान बनेंगे स्मार्ट, फोन से कीट और रोग प्रबंधन
~ सतेंद्र सिंह
बिजनौर। किसानों को उनके स्मार्टफोन पर ही कीट और रोग प्रबंधन के लिए NPSS एक शक्तिशाली उपकरण प्रदान करता है। जिला स्तर पर कृषि विभाग और KVKs इस प्रणाली के अधिकतम उपयोग के लिए किसानों को शिक्षित और सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और फसल के नुकसान को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
बिजनौर के उपकृषि निदेशक डा. घनश्याम वर्मा ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि नेशनल पेस्ट सर्विलांस सिस्टम किसानों के लिए कृषि से संबंधित एक महत्वपूर्ण प्रणाली है। किसान इसका उपयोग करके अपनी उपज को कीट से सुरक्षित रख सकते हैं। अपनी किसी भी समस्या के समाधान के लिए वह पंचायत स्तर पर कृषि मित्र से परामर्श हासिल कर सकते हैं। इस योजना के विषय में उन्होंने विस्तार से जानकारी दी।

नेशनल पेस्ट सर्विलांस सिस्टम (NPSS) क्या है?
नेशनल पेस्ट सर्विलांस सिस्टम (NPSS) भारत सरकार द्वारा फसलों को कीटों और बीमारियों से बचाने और किसानों को समय पर सही जानकारी व सलाह देने के उद्देश्य से शुरू की गई एक प्रणाली है। इसका मुख्य लक्ष्य कीटों और रोगों के प्रकोप का प्रारंभिक पता लगाना, निगरानी करना और भविष्यवाणी करना है, ताकि समय रहते उचित नियंत्रण उपाय किए जा सकें और फसल के नुकसान को कम किया जा सके। यह प्रणाली डिजिटल तकनीकों का उपयोग करती है ताकि कीट और रोगों से संबंधित डेटा को इकट्ठा किया जा सके, उसका विश्लेषण किया जा सके और किसानों तथा संबंधित कृषि अधिकारियों तक पहुंचाया जा सके।
NPSS के मुख्य उद्देश्य:
कीटों और रोगों की निगरानी:
फसलों पर कीटों और रोगों की उपस्थिति, तीव्रता और प्रसार की निरंतर निगरानी करना।
प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली: संभावित प्रकोपों की पहचान करना और किसानों को समय पर चेतावनी देना ताकि वे निवारक उपाय कर सकें।
डेटा संग्रह और विश्लेषण: कीटों और रोगों से संबंधित सटीक और अद्यतन डेटा एकत्र करना और उसका वैज्ञानिक विश्लेषण करना।
सटीक भविष्यवाणी: एकत्रित डेटा के आधार पर भविष्य में होने वाले प्रकोपों की भविष्यवाणी करना।
सलाह और सिफारिशें: किसानों को कीट और रोग प्रबंधन के लिए उचित और प्रभावी सलाह और सिफारिशें प्रदान करना।
नीति निर्धारण में सहायता: प्राप्त जानकारी का उपयोग करके कृषि नीतियों और रणनीतियों को तैयार करना।

कैसे काम करता है NPSS ?
NPSS कई स्तरों पर काम करता है और इसमें विभिन्न हितधारक शामिल होते हैं:
फील्ड स्तर पर डेटा संग्रह: कृषि वैज्ञानिक और विस्तार अधिकारी: ये खेतों का नियमित रूप से दौरा करते हैं और कीटों व रोगों की पहचान करते हैं, उनकी गंभीरता का आंकलन करते हैं।
किसान: किसान भी अपने मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से या स्थानीय कृषि कार्यालयों को कीट/रोग की समस्या की रिपोर्ट कर सकते हैं।
रिमोट सेंसिंग: कुछ मामलों में, सैटेलाइट और ड्रोन जैसी तकनीकों का उपयोग करके बड़े क्षेत्रों में फसल स्वास्थ्य की निगरानी की जाती है।
डेटा का ट्रांसमिशन: एकत्रित डेटा को डिजिटल प्लेटफॉर्म (जैसे मोबाइल ऐप, वेब पोर्टल) के माध्यम से केंद्रीय डेटाबेस तक पहुंचाया जाता है।
डेटा विश्लेषण: केंद्रीय स्तर पर, कृषि विशेषज्ञ और डेटा विश्लेषक इस डेटा का विश्लेषण करते हैं। इसमें ऐतिहासिक डेटा, मौसम संबंधी जानकारी और कीटों/रोगों के प्रसार पैटर्न का भी उपयोग किया जाता है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) जैसी तकनीकों का भी उपयोग किया जा सकता है ताकि सटीक भविष्यवाणियां की जा सकें।
सलाह और प्रसार: विश्लेषण के आधार पर, विशिष्ट क्षेत्रों या फसलों के लिए उपयुक्त सलाह और सिफारिशें तैयार की जाती हैं।
यह जानकारी किसानों तक विभिन्न माध्यमों से पहुंचाई जाती है…
SMS अलर्ट: किसानों को उनके मोबाइल पर सीधे चेतावनी संदेश और उपाय भेजे जाते हैं। मोबाइल एप्लिकेशन: विशेष रूप से विकसित ऐप्स के माध्यम से विस्तृत जानकारी और प्रबंधन विधियां प्रदान की जाती हैं। वेब पोर्टल: कृषि विभाग की वेबसाइटों पर नवीनतम अपडेट और सलाह उपलब्ध होती है। कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs): स्थानीय कृषि वैज्ञानिक और अधिकारी सीधे किसानों से संवाद करते हैं।
NPSS का महत्व:
फसल सुरक्षा: समय पर हस्तक्षेप से फसलों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता है, जिससे किसानों की आय सुरक्षित रहती है। रासायनिक कीटनाशकों का कम उपयोग: सटीक और लक्षित जानकारी से अनावश्यक कीटनाशक उपयोग से बचा जा सकता है, जिससे पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। खाद्य सुरक्षा: फसल के नुकसान को कम करके देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद करता है। किसानों का सशक्तिकरण: किसानों को बेहतर निर्णय लेने के लिए आवश्यक जानकारी प्रदान करके उन्हें सशक्त बनाता है। अर्थव्यवस्था को बढ़ावा: कृषि क्षेत्र में स्थिरता लाकर समग्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है।
कुल मिलाकर नेशनल पेस्ट सर्विलांस सिस्टम एक आधुनिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण है जो भारत में कृषि को कीटों और बीमारियों के खतरों से बचाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
नेशनल पेस्ट सर्विलांस सिस्टम (NPSS) के तकनीकी पहलुओं और किसानों के लिए इसके जिला-स्तर पर लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी के लिए यह समझना ज़रूरी है कि यह प्रणाली कैसे काम करती है ताकि इसका अधिकतम लाभ उठाया जा सके।
नेशनल पेस्ट सर्विलांस सिस्टम (NPSS) का तकनीकी विवरण:
NPSS एक डिजिटल और डेटा-संचालित प्रणाली है जो आधुनिक तकनीकों का लाभ उठाती है। इसके प्रमुख तकनीकी घटक इस प्रकार हैं: कई गांवों में किसान समूह या सहकारी समितियां होती हैं। NPSS द्वारा प्राप्त जानकारी को इन समूहों के माध्यम से साझा किया जा सकता है, जिससे सभी सदस्य लाभान्वित हो सकें।
मोबाइल एप्लिकेशन (NPSS App): यह NPSS का सबसे महत्वपूर्ण इंटरफ़ेस है, खासकर किसानों और कृषि विस्तार कार्यकर्ताओं के लिए। यह एंड्रॉइड और iOS जैसे सामान्य मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम पर उपलब्ध होता है।
मुख्य कार्य: फील्ड डेटा संग्रह: किसान या कृषि अधिकारी खेत में मौजूद कीट या रोग की फोटो खींचकर ऐप पर अपलोड कर सकते हैं। इसके साथ ही, वे फसल का प्रकार, रोग के लक्षण, कीट की संख्या आदि जानकारी भी दर्ज करते हैं।
GPS/भू-स्थानिक टैगिंग: ऐप स्वचालित रूप से डेटा संग्रह स्थान की GPS निर्देशांक (Geographical Positioning System) को रिकॉर्ड करता है, जिससे प्रकोप के सटीक स्थान का पता चलता है।
ऑफ़लाइन कार्यक्षमता: कई ऐप्स में ऑफ़लाइन काम करने की क्षमता होती है, ताकि नेटवर्क न होने पर भी डेटा रिकॉर्ड किया जा सके और बाद में सिंक्रनाइज़ किया जा सके। सलाह प्राप्त करना: किसान अपनी समस्या की फोटो अपलोड करने के बाद ऐप पर ही विशेषज्ञ सलाह और प्रबंधन के तरीके प्राप्त कर सकते हैं।
बहुभाषी समर्थन: ऐप विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध होता है, ताकि किसानों के लिए इसका उपयोग करना आसान हो।
वेब पोर्टल और केंद्रीय डेटाबेस:
एक केंद्रीय वेब पोर्टल और मजबूत डेटाबेस NPSS का दिल है।
कार्य: सभी एकत्रित डेटा (किसानों और फील्ड स्टाफ द्वारा अपलोड की गई जानकारी) को एक केंद्रीय डेटाबेस में संग्रहीत किया जाता है। इस पोर्टल के माध्यम से कृषि वैज्ञानिक, विशेषज्ञ और नीति-निर्माता डेटा को एक्सेस और विश्लेषण कर सकते हैं। यह डैशबोर्ड और विज़ुअलाइज़ेशन टूल प्रदान करता है ताकि कीट और रोग के प्रसार के पैटर्न को आसानी से देखा जा सके।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML):
NPSS इस क्षेत्र में AI और ML एल्गोरिदम का उपयोग करता है।
कार्य:
छवि पहचान: AI एल्गोरिदम अपलोड की गई कीटों या रोगों की तस्वीरों का विश्लेषण करते हैं और उनकी पहचान करने में मदद करते हैं। यह मानव पहचान की तुलना में अधिक तेज़ और सटीक हो सकता है।
पैटर्न विश्लेषण: ML मॉडल ऐतिहासिक डेटा, मौसम के पैटर्न और वर्तमान निगरानी डेटा का विश्लेषण करके भविष्य के कीट प्रकोपों की भविष्यवाणी करते हैं। उदाहरण के लिए, वे बता सकते हैं कि अगले कुछ दिनों में या हफ्तों में किसी विशेष क्षेत्र में किस कीट या रोग का प्रकोप हो सकता है।
सलाह अनुकूलन: AI किसानों की विशिष्ट समस्या, फसल के प्रकार और स्थानीय मौसम के आधार पर अनुकूलित (personalized) सलाह उत्पन्न करने में मदद करता है।
भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS):
GIS तकनीक का उपयोग कीट और रोग के प्रकोप को नक्शे पर दर्शाने के लिए किया जाता है।
कार्य:
यह प्रकोप के हॉटस्पॉट (जहां समस्या अधिक है) की पहचान करने में मदद करता है।
यह कृषि अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों को प्राथमिकता देने और संसाधन आवंटित करने में सहायता करता है।
नक्शे पर प्रकोप के प्रसार को देखकर, अधिकारी प्रभावी नियंत्रण रणनीति बना सकते हैं।
संचार प्रोटोकॉल:
डेटा और सलाह के कुशल आदान-प्रदान के लिए मजबूत संचार प्रोटोकॉल आवश्यक हैं।
इसमें SMS गेटवे (किसानों को अलर्ट भेजने के लिए), ईमेल सिस्टम और API (एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफ़ेस) शामिल हैं जो विभिन्न कृषि-संबंधी प्रणालियों के बीच डेटा साझाकरण की सुविधा प्रदान करते हैं।
जिला स्तर पर NPSS का लाभ कैसे उठाएं किसान?
जिला स्तर पर किसानों के लिए NPSS का लाभ उठाने के कई तरीके हैं:
NPSS मोबाइल ऐप का उपयोग करें:
एप डाउनलोड करें: किसान अपने स्मार्टफोन में कृषि विभाग या संबंधित सरकारी पोर्टल से NPSS ऐप डाउनलोड कर सकते हैं।
समस्या की पहचान: खेत में किसी कीट या रोग के लक्षण दिखने पर, किसान तुरंत ऐप खोलकर प्रभावित हिस्से की स्पष्ट तस्वीर खींचें और ऐप पर अपलोड करें।
विवरण दर्ज करें: ऐप में फसल का प्रकार, कीट/रोग के लक्षण (जैसे पत्तियां पीली पड़ना, छेद होना, कीटों की संख्या), और समस्या कब से है, आदि जैसे आवश्यक विवरण दर्ज करें।
सलाह प्राप्त करें: ऐप AI और विशेषज्ञ प्रणाली का उपयोग करके आपको तुरंत कीट/रोग की संभावित पहचान और उसके प्रबंधन के लिए प्रारंभिक सलाह प्रदान करेगा। इसमें जैविक, रासायनिक या अन्य एकीकृत नियंत्रण के उपाय शामिल हो सकते हैं।
सतर्कता और चेतावनी: ऐप के माध्यम से किसानों को उनके क्षेत्र में संभावित कीट प्रकोपों या रोगों के बारे में समय पर अलर्ट और चेतावनी भी मिल सकती है।
कृषि विस्तार अधिकारी और कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs):
प्रशिक्षण: जिला कृषि विभाग और KVKs NPSS ऐप के उपयोग और कीट/रोग पहचान के लिए किसानों को प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करते हैं। इन प्रशिक्षणों में भाग लें।
सीधी सहायता: यदि किसान ऐप का उपयोग करने में कठिनाई महसूस करते हैं या उन्हें अधिक विशिष्ट सलाह की आवश्यकता होती है, तो वे अपने स्थानीय कृषि विस्तार अधिकारी या KVK वैज्ञानिक से संपर्क कर सकते हैं। ये अधिकारी किसानों द्वारा बताई गई समस्याओं को NPSS सिस्टम में दर्ज करने में मदद कर सकते हैं और विशेषज्ञों से संपर्क स्थापित करा सकते हैं।
सामूहिक चर्चा: KVKs किसानों के समूह के साथ बैठकें आयोजित कर सकते हैं जहाँ NPSS द्वारा प्राप्त जानकारी और सलाह पर चर्चा की जाती है और समाधान सुझाए जाते हैं।
जिला कृषि विभाग के कार्यालय:
किसान सीधे जिला कृषि विभाग के कार्यालय में जाकर अपनी फसल की समस्या बता सकते हैं। कार्यालय में मौजूद कर्मचारी NPSS प्रणाली का उपयोग करके उनकी समस्या को दर्ज कर सकते हैं और उन्हें संबंधित सलाह प्रदान कर सकते हैं।
कई कार्यालयों में हेल्पडेस्क भी होते हैं जो NPSS से संबंधित जानकारी और सहायता प्रदान करते हैं।
सामुदायिक जानकारी साझाकरण:
कई गांवों में किसान समूह या सहकारी समितियां होती हैं। NPSS द्वारा प्राप्त जानकारी को इन समूहों के माध्यम से साझा किया जा सकता है, जिससे सभी सदस्य लाभान्वित हो सकें।संक्षेप में, NPSS किसानों को उनके स्मार्टफोन पर ही कीट और रोग प्रबंधन के लिए एक शक्तिशाली उपकरण प्रदान करता है। जिला स्तर पर कृषि विभाग और KVKs इस प्रणाली के अधिकतम उपयोग के लिए किसानों को शिक्षित और सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह किसानों को आत्मनिर्भर बनाने और फसल के नुकसान को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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