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Lucknow गोमतीनगर में यहां रोजाना रोड पर लगता है घंटों जाम

VIP छात्रों की वजह से यातायात और राहगीरों की परेशानी 

CMS: “सैंया भये कोतवाल, तो अब डर काहे का…”

लखनऊ। राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर स्थित सिटी मॉन्टेसरी स्कूल (CMS) के सामने का नजारा हर सुबह और दोपहर एक ही कहानी बयां करता है- अव्यवस्थित यातायात, राहगीरों की परेशानी और पुलिस प्रशासन की चुप्पी। स्कूल में पढ़ने वाले आईएएस, आईपीएस और पीसीएस अधिकारियों के बच्चे और उनका रसूख इतना हावी है कि सड़क पर गाड़ियां मनमाने ढंग से खड़ी होती हैं, जिससे ट्रैफिक जाम हो जाता है। इससे स्कूल के सामने से गुजरने वाले वाहन चालक और पैदल यात्री घंटों जाम में फंसे रहते हैं। लोगों को न सिर्फ अपनी मंजिल तक पहुंचने में देरी होती है, बल्कि इस अव्यवस्था से दुर्घटना का खतरा भी बढ़ जाता है। हैरानी की बात यह है कि यातायात पुलिस और स्थानीय प्रशासन भी इस मनमानी को रोकने में पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं। ऐसा लगता है कि कुछ बच्चों का भविष्य संवारने के लिए सैंकड़ों राहगीरों की मुश्किलें नजरअंदाज की जा रही हैं।

गोमतीनगर के विशाल खंड में स्थित सिटी मॉन्टेसरी स्कूल (CMS) के सामने रोज सुबह और दोपहर के समय यातायात की समस्या विकराल रूप धारण कर लेती है। इसका मुख्य कारण स्कूल में पढ़ने वाले आईएएस, आईपीएस और पीसीएस अधिकारियों के बच्चों का होना बताया जा रहा है। प्रशासनिक मेलजोल और रसूख की वजह से स्कूल प्रबंधन का रवैया मनमाना हो गया है, जिसका खामियाजा आम राहगीरों को भुगतना पड़ रहा है।

स्कूल के बाहर सड़कों पर गाड़ियाँ अव्यवस्थित और गलत तरीके से खड़ी रहती हैं, जिससे यातायात बुरी तरह से बाधित होता है। पुलिस प्रशासन और यातायात पुलिस की निष्क्रियता इस समस्या को और भी बढ़ा रही है। आरोप है कि पुलिस और प्रशासन भी स्कूल प्रबंधन के आगे नतमस्तक हैं और कोई कार्रवाई करने में असमर्थ हैं।

क्या कानून से ऊपर है सीएमएस?

स्कूल के इस रवैये को देखते हुए बीएसए (बेसिक शिक्षा अधिकारी) और डीआईओएस (जिला विद्यालय निरीक्षक) भी लाचार नजर आ रहे हैं। सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासनिक अधिकारियों के बच्चों के पढ़ने की वजह से सीएमएस स्कूल को नियमों का उल्लंघन करने की छूट मिली हुई है? और क्या आम जनता को इस तरह की परेशानियों का सामना करते रहना पड़ेगा? यह स्थिति प्रशासन की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े करती है। जब बीएसए और डीआईओएस जैसे अधिकारी भी स्कूल पर लगाम नहीं लगा पा रहे हैं, तो यह सोचना लाज़मी है कि क्या लखनऊ में कोई भी संस्था नियमों से ऊपर हो सकती है। अगर कानून सभी के लिए समान है, तो फिर इस तरह की मनमानी को क्यों बर्दाश्त किया जा रहा है? जब तक प्रशासन सख्ती से कदम नहीं उठाता, तब तक यह समस्या बनी रहेगी। यह न सिर्फ यातायात की समस्या है, बल्कि यह कानून के राज पर भी एक बड़ा सवाल है।

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