देव दीपावली विशेष
माधोपुर में पारंपरिक रूप से मनाया जा रहा भव्य देव दीपावली
ग्रामवासियों, स्वयं सहायता समूहों और पर्यटन विभाग के सहयोग से जगमगा रहा शूलटंकेश्वर घाट
ग्रामीण पर्यटन से जगमगायी आस्था की रोशनी- जयवीर सिंह
कार्तिक पूर्णिमा पर आस्था से सराबोर काशी, लाखों श्रद्धालुओं ने किया गंगा स्नान


लखनऊ/वाराणसी। कार्तिक पूर्णिमा की पावन भोर पर वाराणसी के घाट श्रद्धा और भक्ति से भर उठे, जब लाखों श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान कर पुण्य अर्जित किया। आरती, दीपदान और गूंजते मंत्रों के बीच आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि कार्तिक पूर्णिमा स्नान न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह काशी की जीवंत आध्यात्मिक विरासत को भी दर्शाता है। उन्होंने कहा, “हर वर्ष लाखों श्रद्धालु काशी पहुंचते हैं, जिससे यह शहर न केवल भक्ति का केंद्र बनता है बल्कि उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक समृद्धि का वैश्विक प्रतीक भी बन चुका है,”

देव दीपावली के पावन अवसर पर इस वर्ष काशी का ‘दक्षिण द्वार’ अद्भुत आध्यात्मिक आलोक से जगमगा रहा है। उत्तर प्रदेश की ग्रामीण पर्यटन योजना अंतर्गत चयनित वाराणसी जनपद का माधोपुर गांव अपनी विशिष्ट परंपराओं और लोक सहभागिता के साथ देव दीपावली का पर्व विशेष रूप से मना रहा है। गंगा तट पर अवस्थित शूलटंकेश्वर मंदिर, जिसे काशी का दक्षिण द्वार भी कहा जाता है, भव्य दीपोत्सव का साक्षी बन रहा है। ग्रामीण पर्यटन के तहत देव दीपावली की पूर्व संध्या पर शूलटंकेश्वर गंगा घाट पर दीप प्रज्वलित किए गए। यह जानकारी उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने दी।


मंत्री ने बताया कि ‘शूलटंकेश्वर मंदिर का उल्लेख स्कंद पुराण के काशी खंड में भी मिलता है। मंदिर की पौराणिकता आगंतुकों को आकर्षित करती है। इस भव्य आयोजन में जलने वाले दीये माधोपुर गांव के साथ पंचकोशी यात्रा मार्ग अंतर्गत गांव के कुम्हारों द्वारा बनाए गए हैं।’


विभाग द्वारा चयनित संस्था ने जलाए हजारों दीये

देव दीपावली का यह भव्य आयोजन उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग के तत्वावधान में हुआ। विभाग द्वारा चयनित परियोजना संस्था ‘बकरी छाप’ के साथ-साथ स्थानीय होमस्टे लाभार्थियों, स्टेकहोल्डर्स, स्वयं सहायता समूहों और एनजीओ के सहयोग से पूरा कार्यक्रम आयोजित किया गया। आयोजन के दौरान प्राचीन शूलटंकेश्वर घाट और उसके आसपास का पूरा क्षेत्र ग्राम वासियों द्वारा हजारों मिट्टी के दीयों से आलोकित किया गया, जिससे पूरा दक्षिण काशी दीपों की अद्भुत आभा से नहा उठा।
ICSSR का भी सहयोग

इस अवसर पर भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR), नई दिल्ली द्वारा प्रायोजित कार्यक्रम “काशी की मृत्तिका कला: अतीत, वर्तमान एवं भविष्य” के अंतर्गत, वसंत महिला महाविद्यालय, राजघाट (काशी हिन्दू विश्वविद्यालय से संबद्ध) के सौजन्य से 1001 दीपक प्रदान किए गए, जिससे यह पर्व और अधिक भव्य एवं उज्ज्वल बन सके।
‘हेरिटेज स्टोरी टेलिंग’ सत्र

दीप प्रज्ज्वलन के साथ ही एक विशेष ‘हेरिटेज स्टोरी टेलिंग’ सत्र का आयोजन हुआ, जिसमें शूलटंकेश्वर मंदिर की पौराणिक कथा और माधोपुर गांव में पर्यावरण संरक्षण की परंपरा पर रोचक प्रस्तुतियां दी गई। इस सत्र के माध्यम से ग्राम वासियों को उत्तर प्रदेश ग्रामीण पर्यटन परियोजना की योजनाओं एवं उनके लाभों की जानकारी भी प्रदान की गई।
शूलटंकेश्वर महादेव मंदिर को जानें

वाराणसी जनपद में रोहनिया विधानसभा क्षेत्र के माधोपुर में गंगा तट पर शूलटंकेश्वर महादेव मंदिर स्थित है। मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यता है कि गंगा नदी जब काशी में प्रवेश करने वाली थीं, तब भगवान शिव ने काशी की रक्षा के लिए अपने त्रिशूल से गंगा के वेग को रोक दिया था। शिव ने गंगा से वचन लिया था, कि वे काशी को स्पर्श करती हुई प्रवाहित होंगी और काशी के भक्तों को कोई हानि नहीं होगी। यह कैंट स्टेशन से 15 किलोमीटर और अखरी बाईपास से करीब चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित मंदिर है। भगवान भोलेनाथ के दर्शन-पूजन के लिए यहां आम दिनों में तो श्रद्धालु आते ही हैं, देव दीपावली, शिवरात्रि और सावन में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
चंद्रावती, कैथी, उमराह में भी दीप पर्व

देव दीपावली के पावन उत्सव पर ग्राम माधोपुर में आयोजित ‘दीप पर्व’ न केवल श्रद्धा और आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह ग्रामीण पर्यटन, लोक संस्कृति, पारंपरिक कला एवं सामुदायिक सहभागिता का भी जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है। ग्रामीण पर्यटन योजना अंतर्गत चयनित अन्य गांव- चंद्रावती (जैन धर्म के आठवें तीर्थंकर चंद्रप्रभु की जन्मस्थली), कैथी (मार्कण्डेय महादेव मंदिर), उमराह और रहती (त्रिलोचन महादेव मंदिर) में भी इसी क्रम में मिट्टी के दीयों से देव दीपावली मनाया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि ‘पर्यटन विभाग का उद्देश्य है कि देव दीपावली जैसे आयोजनों के माध्यम से ग्रामीण पर्यटन को सशक्त किया जाए। इससे स्थानीय कारीगरों को प्रोत्साहन मिलता है साथ ही अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलती है। ऐसे प्रयासों से उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान प्रदान दिलाने में मदद मिलती है।’
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