श्रम विभाग में नियुक्ति घोटाले के सूत्रधार सपा विधायक?

माननीय के दबाव में हुआ श्रम विभाग का नियुक्ति घोटाला! श्रमिक मृत्यु अंत्येष्टि व विकलांग सहायता योजना में हुआ था घोटाला। बाद में आउटसोर्सिंग पर नियुक्त 12 लड़कों को धमका कर लिया इस्तीफा। उनकी जगह की गईं नियम विरुद्ध नई नियुक्तियां। एक माननीय के दबाव में रचा गया पूरा खेल!

बिजनौर। श्रम विभाग बिजनौर में एक और घोटाला हो गया। श्रमिक मृत्यु अंत्येष्टि व विकलांग सहायता योजना में हुए घोटाले के बाद इसी अगली कड़ी में विभाग द्वारा आउटसोर्सिंग पर की गई नियुक्ति में खेल किये जाने के संकेत मिले हैं। इस मामले का मुख्य सूत्रधार वर्तमान सपा विधायक एवं एक बोर्ड के तत्कालीन सदस्य को बताया जा रहा है!

धमका कर ले लिया 13 कर्मचारियों का इस्तीफा-
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस विभाग में 2015-16 में आउटसोर्सिंग से कुल 13 नियुक्ति की गई थी,  जिसमें से अत्यधिक दबाव व किसी भी मामले में फंसाने की धमकी मिलने के बाद 12 ने 7-1-19 में इस्तीफा दे दिया था। यहाँ गौर करने वाली बात है कि आज की बेरोजगारी में युवा संविदा में जहाँ भर्ती के लिए लाइन में लग जाते हैं ऐसे में श्रम विभाग में चार वर्ष तक आजीविका पर जमे 12 लड़कों को स्वयं इस्तीफा देकर नौकरी छोड़नी पड़ी।

हैरत में डालने वाली कहानी- इस्तीफा दिये जाने की कहानी भी हैरत में डालने वाली है, इस विभाग में पूर्व में कार्यरत रह चुके तथा वर्तमान में सपा के टिकट से विधायक बने एक माननीय को बताया जा रहा है। इस्तीफा दे चुके युवाओं ने बताया कि उस समय श्रम मन्त्री के काफी नजदीक रहे रामौतार सैनी उ० प्र० भवन एवं सह निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के सदस्य पद पर नियुक्त थे। पहले इस विभाग में कार्यरत रहने के कारण यहाँ की उपयोगिता को जानते भी थे। इसलिए रामौतार सैनी ने इन लड़कों पर झूठी शिकायतें करवा कर उच्च स्तर पर दबाव बनाते हुए इस्तीफा देने को मजबूर किया ताकि इनकी इच्छा अनुसार इनके रिश्तेदार व निकटतम को विभाग में रक्खा जा सके। चूंकि रामौतार सैनी प्रदेश में विभाग के प्रतिष्ठित व प्रभावी पद पर आसीन थे, इन युवाओं पर दबाव बनाने में सफल रहे। नाम न बताने की शर्त पर कुछ युवाओं ने दावा किया कि अगर हम इस्तीफा नहीं देते तो हमें किसी भी झूठे मामलों में फंसाया जा सकता था।

तुरंत ही नौकरी पर रख लिये विधायक के रिश्तेदार- गौरतलब है कि इन बारह युवाओं के इस्तीफा देने के बाद ही रामौतार सैनी के भांजे राजवीर सैनी को रख लिया गया। इनके अलावा मेघनाथ सैनी, हिमांशु सैनी, रामौतार सैनी के ड्राइवर के भाई अंकुल व राहुल भारती भी नौकरी हासिल करने वालों में शामिल हैं। इन सभी को जनवरी में पुराने लड़कों के इस्तीफा देने के बाद इसी महीने में रख लिया गया।

मिला था प्रशस्ति पत्र- गौरतलब है कि जिन बारह लड़कों को हटाया गया, उन पर चार वर्षों में कभी कोई आरोप नहीं लगा, न किसी घपले में शामिल रहे। इस बात की पुष्टि में निवर्तमान सहायक श्रम आयुक्त सरजीत सिंह द्वारा इन सभी को सन्तोषजनक कार्य व ईमानदारी से करने के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाना है। इन सभी लड़कों को निवर्तमान सहायक श्रम आयुक्त घनश्याम सिंह के समय हटाया गया था, जो वर्तमान में मेरठ में हैं तथा बातचीत में यह स्वीकार करते हैं कि रामौतार सैनी के दबाव के चलते इन लड़कों को हटाने के लिए इस्तीफे लिए गए थे। घनश्याम सिंह का कहना है कि रामौतार सैनी के दबाव में ही तीन लड़कों सिद्दार्थ चौहान, हेमंत व अभिषेक वालिया के विरुद्ध योजनाओं में अनियमितता बरतने के बारे में शिकायत उच्च स्तर पर की गई थी, जबकि सिद्दार्थ चौहान जो कि अनुसेवक के पद पर कार्यरत् था, उसका किसी योजना से दूर तक कोई लेना देना नहीं था। इन बारह लड़कों  के इस्तीफा देने के बाद एक हफ्ते में ही पहले से तय लड़कों को रख लिया गया। इसके लिए विभाग ने नियुक्ति के लिए किसी समाचारपत्र में न कोई विज्ञप्ति जारी की, न ही कोई नोटिस कार्यालय पर चस्पा किया। रखे गए लड़कों के टाइपिंग टैस्ट तक लिया जाना जरुरी नहीं समझा गया। इस मामले में सपा विधायक का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

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